औरतें हैज़ रोकने के लिए जो दवा का इस्तेमाल करती हैं ताकि रमज़ान के रोज़े रख सके या तवाफ़ कर सके इस वजह से तक़दीर ए इलाही में भी मुदाखिलत (दखल अंदाज़ी) होती है और कभी कभी बीमारियों का भी सामना करना पड़ता है तो इस तरह दवा खा कर हैज़ को रोकना कैसा*
🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ 🌹ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ* *🌹السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ* *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *🧮 पोस्ट 051▪️* *📝 सवाल-;* *📇 औरतें हैज़ रोकने के लिए जो दवा का इस्तेमाल करती हैं ताकि रमज़ान के रोज़े रख सके या तवाफ़ कर सके इस वजह से तक़दीर ए इलाही में भी मुदाखिलत (दखल अंदाज़ी) होती है और कभी कभी बीमारियों का भी सामना करना पड़ता है तो इस तरह दवा खा कर हैज़ को रोकना कैसा* *✍️ जवाब-;* *📇 जहां तक मानेअ् हैज़ दवाओं के जाइज़ व ना जाइज़ होने का ताल्लुक है तो चूंकि शरीअ़त में इस की मुमानअ़त (यानी मना) या उसके अदमे जवाज़ (यानी जाइज़ न होने) का कोई जुज़्या (ऐसा देखने में) नहीं है इस लिए उसका इस्तेमाल ना जाइज़ व गुनाह तो नहीं होगा अलबत्ता तकदीरे इलाही में मुदाखिलत और बाज़ बीमारियों को दावत देने के मुतरादिफ होने की वजह से इस से बचना ज़्यादा मुनासिब है कुछ औरत यह ख्याल करती है कि जो रमज़ान में हमारी रोज़ा छूट जाती है तो बाद में क़ज़ा रखने से सवाब में कमी आ जाती है महज़ यह ख्याल गलत फहमी ह...