औरत का लफ्जी माना
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*🥀 औरत का लफ्जी माना 🥀*
✏️ औरत के लुगवी माना है छुपाने की चीज अल्लाह महबुब सल्लल्लाहु तआला अलैही व सल्लम का फरमाने आलिशान है की
🌹औरत -औरत यानी छुपानी की चीज है जब वह निकलती है तो उसे शैतान झांक कर देखता है यानी उसे देखना शैतानी काम है
*📚-सुन्ने अल त्रिमीजी शरीफ जिल्द (2)सफा (392) हदीस (1186)*
*💓 आज कल भी पर्दा जरूरी है*
जी हॉ चन्द बाते अगर पेश नजर रहे तो इन्शाअल्लाह पर्दे के मसाएल समझने मे आसानी रहेगी
*📚 पारह (22) सूरह रतुल अह्जाब की आयत नम्बर (33)*
मे पर्दे का हुक्म देते हुए परवर्दीगार का इरशाद है
और अपने घरो मे ठहरी रहो और बे पर्दा न रहो जैसे अगली जाहिलियत की बे पर्दगी थी
✔️हजरते मौलाना सय्यिद मुहम्मद नईमुद्दीन मुरादाबादी इस के तहत फरमाते है
अगली जाहीलिय्यत से मुराद कब्ले इस्लाम का जमाना है अपनी जीनत व महासीन यानी बनाव सिंघार और जिस्म की खुबियॉ म सलन सीने के उभार वगैरा का इजहार करती थी कि गैर मर्द देखे लिबास ऐसे पहन ती थी जिन के जिस्म के आजा अच्छी तरह न ढ़के
*📚हवाला -खजाइनुल इरफान सफा(673)*
📍अफ्सोस मौजुदा दौर मे भी जमानए जाहीलिय्यत वाली बे पर्दगी पाई जा रही है
यकीनन जैसे उस जमाने मे पर्दा जरूरी था वैसा ही अब भी है
*✒जमानए जाहिलिय्यत की मुद्दत*
🔍हकीमुल उम्मत हजरते मुफ्ती अहमद यार खान फरमाते है काश इस आयत से मौजुदा मुस्लिम औरते इब्रत पकड़े यह औरते उम्महातुल मुआमिनीन से बढ़ कर नही साहीबे रूहुल बयान फरमाया कि हजरते सय्यिदना आदम अलैही सलाम व तूफाने नूह के दरमियान का जमान् जाहीलिय्यत उला कहलाता है
✒जो बारह सौ बहत्तर साल है और ईसा अलैही सलाम और हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैही व सल्लम के दरमियान का जमाना है जो तक्रीबन (600) साल
*📚हवाला नूरूल इरफान सफा (673)*
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